लॉर्ड्स टेस्ट में बार-बार बदली गई गेंदें बनीं चर्चा का विषय – जानिए टेस्ट मैच में क्या हैं बॉल बदलने के नियम ? इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम ने जब लॉर्ड्स टेस्ट खेला, तो एक चीज़ बार-बार सुर्खियों में रही I आप सोच रहे होंगे कोई खिलाडी के बारे पर नहीं मैं बात कर रहा हूँ टेस्ट क्रिकेट में यूज़ होने वाली गेंद के बारे में बार-बार गेंद का बदलना। इस मैच में पुरानी गेंदें इतनी जल्दी खराब हो रही थीं कि अंपायरों को बार-बार रिप्लेसमेंट बॉल लानी पड़ी। हम जानेंगे क्यू गेंद (बॉल) बदलनी पड़ती है इसके रूल क्या है?

पहली पारी में ही भारतीय टीम ने 80 ओवर के बाद नई गेंद ली, लेकिन वो भी सिर्फ 10 ओवर में खराब हो गई। उसके बाद जो गेंद मिली, उसे भी 8 ओवर बाद दोबारा बदलना पड़ा। इंग्लैंड की पारी में कुल 5 बार गेंद बदली गई, और पूरे मैच में 8 बार गेंदें बदली गईं – जो अपने आप में एक अजूबा था।
भारतीय कप्तान शुभमन गिल, उप कप्तान ऋषभ पंत और तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज रिप्लेसमेंट बॉल से खासे नाखुश नज़र आए।
अब सवाल उठता है – आखिर टेस्ट मैचों में गेंद बदली कैसे जाती है? टेस्ट मैच में क्या हैं टेस्ट मैच में क्या हैं Ball Changing Rule?
इन सवालों का जवाब जानने के लिए हमने बात की पूर्व BCCI पैनल अंपायर राजीव रिसोड़कर से। राजीव जी एक टेस्ट मैच में फोर्थ अंपायर रह चुके हैं और 3 महिला वनडे के अलावा 200 से ज़्यादा डोमेस्टिक मैचों में अंपायरिंग कर चुके हैं।
आइए 10 आसान सवालों में समझते हैं टेस्ट मैच में क्या हैं Ball Changing Rule
1. किन-किन वजहों से टेस्ट में गेंद बदली जाती है?
चार मुख्य कारण हैं:
1. गेंद गुम हो जाए – स्टेडियम के बाहर चली जाए या वापस न मिले।
2. गेंद खराब हो जाए – सीम फट जाए, सिलाई खुल जाए या लेदर छिल जाए।
3. गेंद का आकार बिगड़ जाए – यानी D-shape हो जाए।
4. बॉल टैम्परिंग हो – अगर किसी खिलाड़ी ने जानबूझकर बॉल के साथ छेड़छाड़ की हो।
टैम्परिंग होने पर, यदि दोषी फील्डर की पहचान हो जाए तो बल्लेबाज़ रिप्लेसमेंट बॉल चुनते हैं और विपक्षी टीम को 5 रन पेनल्टी मिलती है।
2. अंपायर गेंद की जांच कैसे करते हैं?
अंपायर गेंद को नियमित अंतराल पर चेक करते हैं – ओवर खत्म होने पर, विकेट गिरने पर, या जब बॉल बाउंड्री के बाहर जाती है।

बॉल के आकार की जांच के लिए “गौज टेस्ट” किया जाता है – जिसमें गेंद को दो अलग-अलग साइज़ की रिंग से निकाला जाता है। अगर गेंद एक से निकली और दूसरी में फंस गई, तो वह मान्य मानी जाती है।
3. क्या हर पारी की शुरुआत में नई गेंद मिलती है?
जी हां, हर पारी में शुरुआत एक नई गेंद से होती है। इसके बाद गेंदबाज़ी टीम 80 ओवर के बाद फिर से नई बॉल की मांग कर सकती है।

4. रिप्लेसमेंट गेंदें कहां से आती हैं – क्या है ‘बॉल लाइब्रेरी’?
बॉल लाइब्रेरी का जिम्मा फोर्थ अंपायर का होता है। इसमें पहले से इस्तेमाल की गई गेंदों को रखा जाता है, जो पिछले टेस्ट में प्रयोग में आई थीं। जरूरत पड़ने पर प्रैक्टिस बॉल भी मंगाई जा सकती हैं।
लाइब्रेरी में रखी गई हर गेंद को पहले शेप टेस्ट से गुजारा जाता है।
5. क्या बिल्कुल वैसी ही बॉल दोबारा मिल सकती है?
नहीं, एक जैसी गेंद मिलना लगभग नामुमकिन होता है। लेकिन अंपायर ऐसी गेंद देने की कोशिश करते हैं जो उम्र, साइज और कंडीशन के लिहाज़ से पुरानी गेंद से मेल खाती हो।
> जैसे लॉर्ड्स टेस्ट में भारत ने नई गेंद की मांग की, लेकिन वो गेज टेस्ट में फेल हो गई। नतीजतन टीम को एक पुरानी गेंद दी गई, जिससे खिलाड़ी असंतुष्ट नज़र आए।
6. रिप्लेसमेंट बॉल का चयन कौन करता है?
फील्ड अंपायर, बल्लेबाज़ों और गेंदबाज़ी टीम के कप्तान की मौजूदगी में सबसे उपयुक्त बॉल का चयन करते हैं।
7. क्या अंपायर खुद से गेंद बदल सकते हैं?
हां, अगर अंपायर को लगे कि गेंद खराब हो गई है या उससे छेड़छाड़ हुई है, तो वह बिना किसी अनुरोध के भी गेंद बदल सकते हैं – हालांकि ऐसा कम ही होता है।
8. गेंदबाज़ी टीम कब बॉल बदलने की मांग कर सकती है?
जब गेंद का शेप बिगड़ जाए या वह खेलने लायक न रहे, तो गेंदबाज़ी टीम अंपायर से इसकी शिकायत कर सकती है। फिर अंपायर जांच कर फैसला करते हैं।
9. मैच के बाद गेंदों का क्या होता है?
मैच के बाद उपयोग की गई गेंदों को रिप्लेसमेंट बॉल के रूप में बॉल लाइब्रेरी में रखा जाता है और वे भविष्य के मैचों में काम आती हैं।
10. क्या हर देश अपनी पसंद की गेंद इस्तेमाल करता है?
जी हां। ICC की ओर से कोई ब्रांड फिक्स नहीं है।

* भारत में – SG
* इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में – Duke
* ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका जैसे देशों में – Kookaburra
कौन-सी गेंद इस्तेमाल होगी, यह होस्ट बोर्ड तय करता है, और विज़िटिंग टीम उसमें बदलाव की मांग नहीं कर सकती।
लॉर्ड्स टेस्ट में बार-बार गेंद बदलने की घटनाएं अनोखी ज़रूर थीं, लेकिन इसके पीछे टेस्ट क्रिकेट के नियम और बॉल की देखरेख की जटिल प्रक्रिया छिपी है। क्रिकेट में गेंद सिर्फ एक उपकरण नहीं, बल्कि खेल की दिशा तय करने वाला मुख्य हथियार होती है – और इसी वजह से उसके रखरखाव पर इतना ज़ोर दिया जाता है और समय समय पर ग्राउंड पर भी बॉल की जाँच की जड़ी है जिससे खेल को निष्पक्ष रखा जा सके I
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